Tuesday, November 8, 2022

मानसिक तकलीफे

 

मानसिक व्याधियों का वर्गीकरण

Psychological  Disorders




आज कल जिंदगी तनाव और भागा-दौड़ी की वजह से कई सारी मानसिक तकलीफे आम तौर पे लोगों को सहेन  करनी पड़ रही है |


मन मे तनाव ( emotional stress ) पैदा होना अत्यंत सर्व सामान्य बात हो गई है, लेकिन हमें उस तनाव से बाहर निकलना सीखना अत्यतं जरुरी है|

 अन्यथा ये हीं तनाव आगे बढ़कर मानसिक व्याधीओं के निर्माण होने का कारण बन जाती  है |
मन की व्याधियां विविध प्रकार की होती है | हर व्याधि या तकलीफ की वजह अलग होती है |
मानसिक तकलीफे होने के कारण :


व्यक्ति का मस्तिष्क , मज्जातंतु (neurons), रासायनिक रचना ( chemical makeup ) , व्यक्तिमत्व , तनाव सहने की क्षमता , वातावरण तनाव , इत्यादि विविध घटकों के ऊपर विविध मानसिक समस्यांए निर्माण होनेकी  शक्यता  होती है |


वर्गीकरण :

मन की तकलीफों को व्याधिओं को दो प्रकारों में विभाजित कर सकते है :

न्युरोसिस (neurosis) [मानसिक क्लेश]


Neurosis (मानसिक क्लेश) और psychosis (मनोविकृति) इन दोनों में कुछ प्रमुख फर्क है /
मानसिक क्लेश (neurosis)

व्यक्ती को पता चलता है की उसके विचारों मे और बर्ताव मे कुछ अनचाहा बदलाव आ रहा है । ईस लिये वो चाहता है की किसी तरह से इन नकारत्मक एवं क्लेश दायक विचोरों से बाहर आएँ । और बाहर निकलने की कोशिश करता है ।लोगों की या रिश्तेदारों की मदत लेने के लिए तयार होता है ।
व्यक्ती को वास्तव और अवास्तव विचोरों मे का फर्क समज मे आता है / वास्तविक जीवन (Real Life) मे मानसिक तकलीफों की वजह से होने वाला फर्क उसे अच्छा नहीं लगता ।
व्यक्ती उपचार के लिए किसी विशेषज्ञ की मदत लेने के लिए तयार होता है ।
उदा : उदासीनता (Depression), घबाराहट (Anxiety), अतिभय (Phobia), हृदयविकार (Heart Attack) का भय ( cardiac neurosis ), निंद्रानाश (Insomnia) ऐसे लक्षण आमतौर पर देखे जाते है ।


सयकोसिस (psychosis) [मनोविकृति]

व्यक्ती यह समझ ही नहीं पाता की उसके विचार गलत दिशा में जा रहे है । 

उसके विचारों की वजह से उसके बर्ताव और रोज के जीवन पर असर होने लगता है / उसे रिश्तेदार या आस पास के लोग वास्तव समझाने की कोशिश करते है; लकिन वो मानने को तयार नहीं होता की उसकी कुछ गलत विचार सरणी या गलत धारणाये है / 

उसे लगता है की समझाने वाले ही गलत है /
व्यक्ती को अवास्तव मन की बातें ही वास्तव लगाने लगती है / व्यक्ती के वास्तविक जीवन (Real Life) में होने वाला नुकसान वो समझ नहीं पता /
व्यक्ती डॉक्टर, मनोविकार तज्ञ के पास जाने के लिए बिलकुल तयार नहीं होता /
उदा :. वयक्ती को अलग अलग वेह्म होना / कानों में लोगोंकी आवाजे सुनाई देना / चित्र विचित्र परछाईया - लोग दिखना / अपने खिलाफ कोई साजिश चल रही है / मेरे बारे मे ही लोग बात कर रहे हैं, ऐसा लगते रहना /

Psychosis और Neurosis ये दोनों ही तरह की तकलीफे मस्तिक में होने वाले रसायनों के असंतुलन और तनाव की वजह से होती है /
दोनों ही किस्म की तकलीफों का अच्छी तरह से उपचार करके ठीक किया जा सकता हैं /
कृपया नजदीकी मानसोपचार तज्ञ से मिलने से ना हिचकिचाएं ।।

मानसिक दवाईयाँ : गलतफहमियाँ

 मानसिक तकलिफो के उपचार के बारे में गलत फहमियाँ

(MYTH ABOUT PSYCHIATRIC MEDICATIONS)

“ * मनोसोपचार तज्ञ सिर्फ नींद की गोलियां ही देते है “
सालोंसे यह एक सर्वसामान्य तौर पर लोगों में गलतफहमि बैठ गई है की “ मनोसोपचारतज्ञ (PSYCHIATRIST) सिर्फ नींद की गोली ही देते है | उनसे इंसान पूरा वक्त सोते रहता है | सोते रहने से वह इंसान किसी काम का नहीं रह जाता |”
ईस विचार धारणा निर्माण होने के पीछे कुछ कारण जरुर है | सालों पेहले वैद्यकिय विज्ञान  (medical science) में शोध हुए ; तब विविध मानसिक तकलीफों के लिए जो दवाईयाँ शोध कर के (Research) उपलब्ध की गयी उनमें बिमारियों को ठीक करने के साथ साथ नींद का आड असर / साईड इफ़ेक्ट भी होता था |
ईस वजह से मरीज दवा चालू करने के बाद नींद में रहता था |
लेकिन वो दस – पंधरहा साल पहले की बात है |
आजकल जो नई दवाईयाँ विज्ञानने संशोधन करके निर्माण की है उनमें ईस तरह के साईड इफेक्ट्स नहीं रहतें |
नई दवाईयाँ चालू करने के बाद मरीज की मानसिक तकलीफे धीरे धीरे कम होती जाती है और वह व्यक्ती किसी और आम ईंसान की तरह रोज का काम कर सकता है | चाहें वो घर का काम हो या बाहर का या बोद्धिक काम हो |
ईस लिए “मरीज हमेशा सोते रहेगा” यह वेहम मन में रख कर मनोसोपचार तज्ञ के पास लेकर जाने को ना टाले |मरीज को जल्दी ठीक करना जरुरी होता है |
जो भी साईड इफेक्ट्स दवा से होते है उन्हें अपने डॉक्टर को  खुलकर बताएं | जिस की वजह से मरीज को आछा उपचार मिल सकेगा और आड असर /साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा |

मानसिक तकलीफों में दवाई कैसे काम करती है ।

 “ विचारों की तकलीफ पर दवाई कैसे असर करती है ? “ यह सर्वसाधारणत: मनमें उठने वाला प्रश्न है की “ तकलीफ तो मन की है ; विचारों की है | उसमें दवाई का क्या काम हो सकता है | दवाई तो एक रसायन मात्र है | “ कई संशोधनों के बाद मानसिक विज्ञान शास्त्रज्ञो को पता चला की मन के अंदर विविध प्रकार के रसायन अर्थात न्यूरो ट्रान्समीटरर्स (Neuro- Transmitters) होते है जो विविध विचार, भाव भावनाओं, बरताव ईनके ऊपर कार्य करते है | मस्तिक में अनेक विविध भागों में अनेक खास कार्य निर्धारित किये हुए होते है | मस्तिक में चलने – बोलने का अलग अलग केंद्र होता है वैसे ही विचारों और भाव – भावनाओं के भी अनेक विशेष केंद्र होते है | जब कभी किसी इंसान के जीवन में तनाव बढ़ जाता है ; तब मस्तिक में तनाव के रसायन (Stress-Harmones) निर्माण होते है | जब ये तनाव – रसायन ज्यादा दिनों तक मस्तिक के बढे रहते है तब वे मस्तिक के भाव (Emotion) वाले केंद्र पर कार्य करने लगते है | ईनके कार्य की वजह से ; मस्तिक के उदासीनता (Depression) पैदा करने वाले केंद्र सक्रिय (Activate) होने के वजह से इंसान उदास रहने लगता है | कुछ काम में ; खाने पीने में मन नहीं लगता | लोगों से बातचीत करना कम कर देता है | कभी कभी बीना किसी वजह भी ये तनाव के रसायन तयार होते है ( मस्तिक के अनैसर्गिक (Abnormal) कार्य करने के वजह से |) तो बाहरी वजह न होते हुए भी मस्तिक के मानसिक तकलीफ वाले केंद्र सक्रीय हो जाते है और इंसान का बर्ताव बदल जाता है | ईन तकलीफों के लिए जो औषधियाँ संशोधित हुई है उनमें मस्तिक के मानसिक तकलीफ तयार करने वाले केंद्र पर कार्य करने की क्षमता होती है | ये दवाईयाँ मन के तनाव और उदासिनता देने वाले रसायनों को कम करती है और उत्साह और आनंद देने वाले रसायनों को बढ़ाती है | इसलिए दवाईयाँ मानसिक बिमारियों के काम आती है | मानसिक बीमारी किसी भी आम बीमारी की तरह ही होती है | मधुमेह में स्वादुपिंड (Pancreas) ग्रंथी बराबर काम नहीं करती वैसे ही मानसिक बिमारियों में मस्तिक की कुछ पेशियाँ काम नहीं करती | ईसलिए बिना हिचकिचाहट तकलीफों के उपचार / दवाओं अपने मानसोपचार तज्ञ के मार्गदर्शन में जरुर ले | --डॉ निशिकांत विभुते

OBSESSIVE COMPULSIVE DISORDER

 



“ओ. सी. डी.”OBSESSIVE COMPULSIVE DISORDER
कल्पना – क्रिया अनिवार्यता विकार :


OBSESSIVE COMPULSIVE DISORDER


कल्पना – क्रिया अनिवार्यता विकार म्हणजे काय ?

ऑबसेसिव्ह – कंपल्सिव्ह डिसऑर्डर (ओसीडी) म्हणजे एक प्रकारचा चिंतेचा विकार असतो. याने बाधित झालेल्या वयाक्तिच्या मनात नियंत्रण न ठेवता येण्याजोगे आणि नको ते विचार येऊ लागतात. हे विचार परत परत येताच राहतात  आणि त्या संबंधित क्रिया वारंवार करण्याची प्रबळ ईच्छा मनात दाटून येते . हे विचार मानवाला बेचैन करून टाकतात . विचार काढन्याचा प्रयत्न केला तरी विचार येतच राहतात .
उदाहरण १ :
 विचार हाताला काही तरी घान लागलेली आहे असे वाटणे .जर हात नाही धुतला तर काही तरी भयंकर इन्फेक्शन होइल अशी भीती वाटने .
क्रिया हात स्वच्छ असण्याची खातरजमा करण्यासाठी हात पुनःपुन्हा धुणे,

Monday, November 7, 2022

DEMENTIA , MEMORY LOSS DISORDER, CAREGIVER'S GUIDE IN HINDI .

 



डिमेन्शिया / बुढ़ापे में भूलने की बिमारी :---

१.   व्यक्ति पृष्ठभूमि परिचय तथा जीवन समीक्षा

डिमेन्शिया से व्यक्ति की दीर्घकालीन एवं लघुकालीन दोनों प्रकार की स्मरणशक्ति ही प्रवावित होती है अत: डिमेन्शिया से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करने वाला परिवार का व्यक्ति उसकी व्यक्तिगत स्मृतियों को एक सुव्यवस्थित तरीके से एकत्रित करके तथा जानकारी के आंकड़ों को जुटा कर उल्लेखनीय मदद कर सकता है |
परिवार का देखभालकर्ता ऐसे व्यक्ति को जानकारी को खोजने, फोटो तथा अन्य संबंधित वस्तुओं को ढूढ़ने आदि में मदद कर सकता है | ऐसी चीजें अगर भिन्न – भिन्न घटनाओं तथा भिन्न – भिन्न समय अवधियों का प्रतिनिधित्व करे, तो अच्छा होगा |

Bipolar Mood Disorder Mania introduction

 BIPOLAR I DISORDER

DIAGNOSTIC CRITERIA :

For a diagnosis of bipolar I disorder, it is necessary to meet the following criteria for a manic episode. The manic episode may have been preceded by and may be followed by hypomanic or major depressive episodes.
MANIC EPISODE :
BIPOLAR I DISORDER

A distinct period of abnormally and persistently elevated, expansive, or irritable mood and abnormally and persistently increased goal-directed activity or energy,

Irritable Bowel Syndrome

 



होत सारे लोगों को जानकारी नहीं होती की मन के तनाव से पेट और अन्य शरीरके अवयवों पर असर पद सकता है .
कुछ लोगोंको हमेशा पेट में तकलीफ रहती है . कभी ज्यादा बार मोशन होती है तो कभी दो तीन दिन के लिए नहीं होती .
तनाव की वजह से मस्तिष्क में कुछ स्ट्रेस हारमोंस (STRESS HARMONES) बनते है . जो शारीर केन अन्दर कोर्टिसोल और एड्रेनैलिन नामक रसायनोंको बढाते है .
irritable bowel syndrome

 

ये रसायन पेट के अंतड़ी के  ऊपर कार्य कराती है . कभी आंतडीकी गति बढती है तो कभी कम होती है .
जो दिशा में अन्न का प्रवाह होता है वोह भी कभी कभी अवरोधित होता है , जिस वजह से खाना खाने के बाद खाना ऊपर आना , पेट में ग्यास बन जाना , पित्त एसिडिटी बनाना ये लक्षण निर्माण होने लगते है और इनको देखकर इंसान और भी ज्यादा घबरा जाता है .
इससे और स्ट्रेस हारमोंनस बनाते है , जो इस श्रुंखला को चलाते रहते है .
ऐसे केस में इंसान बहोत तरह के डॉक्टरों को दिखाता है और बहोत सारे तपास करता रहता है . लेकिन तपास में कुछ ख़ास नहीं निकलता .

इन को कभी कभी IRRITABLE BOWEL SYNDROME  भी कहा जाता है .
सही निदान , मन का संतुलन , और कुछ तनाव के रसायन कम करने वाली दवाईया  इस तकलीफ में काम आ सकती है .

Saturday, November 5, 2022

Major Depressive Disorder

 



                                                                  Major Depressive Disorder  


Major Depressive Disorder
Art - Dr Nishikant Vibhute

       

Diagnostic Criteria

A.      Five (or more) of the following symptoms have been present during the same 2-week period and represent a change from previous functioning; at least one of the symptoms is either
(1)    Depressed mood or
(मन उदास रहना)
(2)    Loss of interest or pleasure.
(किसी चीज़ में उत्साह / आनंद न आना)

MIGRAINE HEADACHE - THINGS TO AVOID

 MIGRAINE HEADACHE - THINGS TO AVOID 

Migraine headaches


Migraine headache has many trigger factors . These should be avoided so that episodes are limited.
Migraine Headache
Art- Dr Nishikant Vibhute




If these triggers are neglected , headache is possible despite of ongoing treatment .

Please go through the checklist 


डोके दुखी साठी पत्थ्य / सरदर्द के लिए टाळने / टालना

  • चीज , (CHEESE)
  • चॉकलेट , केक (chocolate , Cake)
  •  कच्चा कांदा ( Raw Onions)
  • थण्डा पाणी (मटका या फ्रिज का) , Cold water - from Fridge / Earthen pot )
  • थण्ड हवा AC या पंखे की हवा मुँह पर लेना (Direct blow of fan or air condition - on face or head .)
  • खट्टा (आम्बट ) दही (Sour Curd) 
  • लोणचे / आचार ( Pickles )
  • उनात जाने / धुप (Sunlight Exposure )
  • उपाशी रहाने / उपवास (Remaining hungry for longer periods of time.)
  • मासे / मछली (Fish - more commonly from Sea Water , With thick Coatings / shells.)
  • मोबाइल लाइट (अँधेरे में मोबाइल देखना ,गेम खेलना ) (Watching Mobile at Late Nights / playing mobile games .) 
  • कंप्यूटर का लाईट (Bright light from PC monitor )
  • कॉफी (Strong Coffee in some cases.) 

We strictly recommend to avoid these things if you are getting migraine headaches , half sided headaches .

Premenstrual Dysphoric Disorder

 If you are getting cranky irritable sobbing before menses, you may be suffering from Premenstrual Dysphoric Disorder. 

Premenstrual Dysphoric Disorder



Premenstrual Dysphoric Disorder  

Very commonly seen in women   . Thereare marked mood swings and irritability , anger outbursts during menstruations . It can be treated if diagnosed  .
Please refer to the diagnostic criteria to find out.
Premenstrual Dysphoric Disorder
Art- Dr Nishikant Vibhute



Diagnostic Criteria                                       625.4 (N94.3)

A. In the majority of menstrual cycles, at least five symptoms must be present in the final week before the onset of menses, start to improve within a few days after the onset of menses, and become minimal or absent in the week postmenses.
(हमेशा मासिक धर्म (माहवारी ) के चालू होने के एक हफ्ते पहले लक्षणों का दिखाना और मासिक धर्म चालू होने के बाद लक्षणों का कम होते जाना या बंद हो जाना )

Trichotillomania (Hair-Pulling Disorder) बाल तोड़ने का बिमारी,

 IF YOU CAN NOT RESIST IMPULSE TO PULL OFF YOUR HAIR YOU MAY BE SUFFERING FROM TRICHOTILLOMANIA.



Trichotillomania (Hair-Pulling 
Disorder)बाल तोड़ने का बिमारी 

Art- Dr. Nishikant Vibhute


इस बिमारी में निम्न लिखित लक्षण देखे जाते है


Diagnostic Criteria                                                                                            312.39 (F63.3)

A.      Recurrent pulling out of one’s hair, resulting in hair loss.(बार बार बाल खीचके तोड़ना )

B.      Repeated attempts to decrease or stop hair pulling.( मनसे बार बार बाल तोड़ने की आदत छोडनें  का प्रयास करना )

C.      The hair pulling causes clinically significant distress or impairment in social, occupational, or other important areas of functioning.( इस आदतके वजह से मनमें खिन्नता और नियमित कार्यों में विघ्न निर्माण होना )

D.      The hair pulling or hair loss is not attributable to another medical condition (e.g., a dermatological condition).( यह आदत किसी शारीरिक , बालों की बिमारी के वजह से न होना )

E.       The hair pulling is not better explained by the symptoms of another mental disorder (e.g., attempts to improve a perceived defect or flaw in appearance in body dysmorphic disorder).( दूसरी कोई मानसिक बिमारी न होना ) .



Attention-Deficit / Hyperactivity Disorder (ADHD)

 Restlessness and excess hyperactivity in children can be pathological sometimes .

It is a treatable condition.
Image Courtesy Pexels



Diagnostic Criteria                                                  

A.  A persistent pattern of inattention and/or hyperactivity-impulsivity that interferes with functioning or development, as characterized by (1)and/or (2):

1.   Inattention:  Six (or more) of the following symptoms have persisted for at least 6 months to a degree that is inconsistent with developmental level and that negatively impacts directly on social and academic / occupational level and that negatively impacts directly on social and academic/occupational activities:

Fear Of Crowded Places : Agoraphobia : Phobia

  Agoraphobia




Image Courtesy : Pexels


Diagnostic Criteria      300.22 (F40.00)
Marked fear or anxiety about two (or more) of the following five situations:
Using public transportation (e.g., automobiles, buses, trains, ships, planes).